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केवट संवाद सुन भावुक हुए श्रद्धालु, उर्मिला के त्याग की कथा ने नम कीं आंखें

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जसवंतनगर (संवाददाता : पंकज राठौर)। क्षेत्र के ग्राम नगला रामसुंदर में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा महायज्ञ के छठे दिवस शुक्रवार को कथा पंडाल भक्ति और भावनाओं से सराबोर हो उठा। कथावाचक आचार्य शशिकांत रामायणी ने रामायण और पुराणों के प्रसंगों का वर्णन करते हुए भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनगमन के दौरान हुए केवट संवाद तथा उर्मिला चरित्र की कथा विस्तार से सुनाई। कथा सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। आचार्य शशिकांत रामायणी ने कहा कि जब भगवान श्रीराम वनवास के लिए अयोध्या से निकले और गंगा तट पहुंचे तो वहां निषादराज केवट ने प्रभु को पहचान लिया। केवट ने प्रभु श्रीराम के चरण धोए बिना नाव में बैठाने से इंकार कर दिया। उसने विनम्र भाव से कहा कि जिस प्रकार प्रभु के चरण स्पर्श से पत्थर भी नारी बन गई, कहीं उसकी नाव भी रूपांतरित न हो जाए।

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इसके बाद केवट ने प्रभु के चरणों को धोकर पूरे परिवार सहित उस चरणामृत को ग्रहण किया। कथावाचक ने बताया कि यह प्रसंग भक्ति, समर्पण और निष्काम सेवा का प्रतीक है। कथा के दौरान उर्मिला चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि लक्ष्मण के वनवास जाने के बाद माता उर्मिला ने चौदह वर्षों तक त्याग, तपस्या और धैर्य का परिचय दिया। उन्होंने परिवार और राज्य की मर्यादा बनाए रखते हुए अपने पति के कर्तव्य पालन में कभी बाधा नहीं बनने दिया। कथावाचक ने कहा कि उर्मिला का त्याग भारतीय नारी शक्ति और समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है, लेकिन रामायण में उनके त्याग की चर्चा कम होती है।

कथा के बीच-बीच में संगीत मंडली द्वारा प्रस्तुत भजन और कीर्तन ने वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा। “राम लला के दर्शन पाकर धन्य हुआ संसार” जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। महायज्ञ में परीक्षित की भूमिका ठाकुर चंद्रवीर सिंह तोमर एवं राजेश्वरी देवी निभा रहे हैं। इस दौरान विश्वनाथ तोमर, राजनरेश सिंह, मनोज तोमर, ब्रज बिहारी सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। आयोजन समिति की ओर से प्रसाद वितरण और श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं की गईं।

Pankaj Rathaur
Pankaj Rathaurhttps://mihnews.in/
जमीन से जुड़ी रिपोर्टिंग में विश्वास रखने और सामाजिक मुद्दों से जुडी खबरे.
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