
मैनपुरी (संवाददाता – अमन कुमार)। जिले में इंसानियत और मानव सेवा की एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। एक अज्ञात व्यक्ति खुद चलकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी तक पहुंचा, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। चिकित्सकों ने उसे बचाने का पूरा प्रयास किया, मगर इलाज के दौरान वह जिंदगी की जंग हार गया। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि उसकी पहचान नहीं हो सकी और 72 घंटे तक अस्पताल प्रशासन व सामाजिक कार्यकर्ता उसके परिजनों के आने का इंतजार करते रहे। उम्मीद थी कि शायद कोई अपना उसे पहचान लेगा, कोई रिश्तेदार उसे लेने आएगा, लेकिन आखिर तक कोई नहीं आया।
जब अपनों ने साथ छोड़ दिया, तब मैनपुरी की सामाजिक संस्था नेताजी सुभाष चंद्र बोस फाउंडेशन ने मानवता का परिचय देते हुए उस अज्ञात शव का पूरे सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कराया। संस्था के सदस्यों ने न केवल अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई, बल्कि यह संदेश भी दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है।संस्था से जुड़े कार्यकर्ताओं ने बताया कि यह उनका पहला कार्य नहीं है। फाउंडेशन अब तक 59 लावारिस शवों का वारिस बन चुका है और सभी का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया गया है।
संस्था के संस्थापक ने बताया कि उन्होंने अपने दो साथियों के साथ इस सेवा कार्य की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे लोगों का सहयोग बढ़ता गया और आज संस्था के साथ लगभग आधा सैकड़ा लोग जुड़ चुके हैं, जो निस्वार्थ भाव से मानव सेवा में लगे हुए हैं।संस्था का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अंतिम संस्कार करना नहीं, बल्कि समाज में मानवता की अलख जगाना है। ऐसे लोग, जिनका इस दुनिया में कोई नहीं बचता, उनके अंतिम सफर को सम्मान देना ही सबसे बड़ी सेवा है। संस्था के सदस्यों ने संकल्प लिया है कि यह सेवा कार्य जीवन पर्यंत जारी रहेगा और जरूरतमंदों की मदद के लिए वे हमेशा आगे खड़े रहेंगे।
