
जसवंतनगर (संवाददाता : पंकज राठौर)। क्षेत्र के ग्राम नगला रामसुंदर में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा महायज्ञ के दूसरे दिन भगवान श्रीराम जन्मोत्सव एवं वैराग्य प्रसंग का बड़े ही भावपूर्ण ढंग से वर्णन किया गया। कथा पंडाल श्रीराम के जयकारों और भक्ति रस से सराबोर नजर आया। श्रद्धालु भजनों पर झूमते रहे और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कथावाचक आचार्य शशिकांत रामायणी ने भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और अन्याय बढ़ता है।
तब-तब भगवान मानवता की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। उन्होंने बताया कि त्रेता युग में भगवान विष्णु ने राजा दशरथ के यहां श्रीराम के रूप में जन्म लेकर राक्षसी शक्तियों का संहार किया और धर्म की पुनर्स्थापना की। कथा के दौरान वैराग्य प्रसंग सुनाते हुए आचार्य ने कहा कि मनुष्य को मोह-माया त्यागकर धर्म, सत्य और मर्यादा के मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों, त्याग, तपस्या और कर्तव्यनिष्ठा को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। वैराग्य प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा के बीच-बीच में संगीत मंडली द्वारा प्रस्तुत भजन और कीर्तन ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। महायज्ञ में परीक्षित की भूमिका ठाकुर चंद्रवीर सिंह तोमर एवं राजेश्वरी देवी निभा रहे हैं। कार्यक्रम में विश्वनाथ तोमर, राजनरेश सिंह, मनोज तोमर, ब्रज विहारी सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। आयोजक डॉ. आशीष प्रताप सिंह एवं डॉ. अर्पिता ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर श्रीराम कथा श्रवण करने की अपील की।
