
जसवंतनगर (संवाददाता : पंकज राठौर) ,इटावा। ग्राम जैनपुर नागर में आयोजित “बौद्ध भीम कथा” के दौरान उस समय भावुक माहौल बन गया, जब कथा वाचिका प्रेमा अम्बेडकर ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर के पिता रामजी मालोजी सकपाल के निधन से जुड़ी मार्मिक कथा का वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद रामजी सकपाल ने अपने पुत्र को उच्च शिक्षा दिलाने का संकल्प निभाया। उनके संघर्ष, अनुशासन और त्याग की गाथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
जैसे ही कथा में पिता के निधन का प्रसंग आया, पंडाल में सन्नाटा छा गया और कई लोगों की आंखें नम हो गईं। प्रेमा अम्बेडकर ने कहा कि यह घटना बाबा साहेब के जीवन के सबसे दुखद क्षणों में से एक थी, जिसने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने अपने पिता के सपनों को पूरा करने का संकल्प और भी मजबूत किया।

कार्यक्रम के तीसरे दिन भी भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। इस दौरान दिनेश कुमार उर्फ लाखन सिंह (जैनपुर नागर), रामगोपाल (नाकऊ) सहित अन्य सात लोगों ने कथा वाचिका प्रेमा अम्बेडकर को नोटों की माला पहनाकर सम्मानित किया। इसी बीच जसवंतनगर थाना प्रभारी कमल भाटी ने कथा पंडाल का निरीक्षण किया। इस अवसर पर पत्रकार सुशील कान्त ने उन्हें डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में अर्जुन सिंह, हुकुम सिंह, भीम प्रकाश, आनंदप्रिय गौतम, कैलाश बाबू, राजेंद्र सिंह, भारत सिंह, अकल सिंह, चन्द्र प्रकाश, रंजीत बाबू, अशोक कुमार, ध्रुव सिंह (एडवोकेट), रमेश कुमार (डीलर), तिलक सिंह, रमाकांत, सुशील कान्त (पत्रकार), सत्येंद्र सिंह (मास्टर), सतीश बाबू, सचिन, मातादीन, महेश, मायाराम, गंगादीन सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे। इसके अलावा कांस्टेबल संजय सिंह, आलोक वर्मा, उपनिरीक्षक शुभम वर्मा एवं उपनिरीक्षक महेन्द्र सिंह भी कथा में उपस्थित रहे। अंत में श्रद्धालुओं ने बाबा साहेब के विचारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया और आयोजन की सफलता में सक्रिय भागीदारी निभाई।
