
- इटावा में अशूरा पर निकले ताजिए, कर्बला में अकीदत के साथ हुए सुपुर्द-ए-खाक
- मोहर्रम पर इटावा में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब, गंगा-जमुनी तहज़ीब की दिखी मिसाल
- ‘या अली-या हुसैन’ के नारों से गूंजा इटावा, शहीद-ए-कर्बला को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
इटावा (संवाददाता पंकज राठौर): दस मोहर्रम (अशूरा) के अवसर पर शहीद-ए-कर्बला हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की याद में इटावा शहर में पारंपरिक ताजियों, अलम, चौकियों और जुल्फिकार के जुलूस श्रद्धा और गमगीन माहौल में निकाले गए। “या अली” और “या हुसैन” के नारों के बीच ताजियों को स्थानीय कर्बला वाइस ख्वाजा में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
इससे पहले शहर के विभिन्न इमामबाड़ों और इमामबारगाहों में कुरानख्वानी, मजलिस और शहादत-ए-कर्बला पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए गए। अलग-अलग मोहल्लों से निकले ताजिए रामगंज चौराहे पर एकत्र हुए, जहां बारह अखाड़ों के उस्तादों और खलीफाओं ने अपने शिष्यों के साथ शहीद-ए-कर्बला को सलामी पेश की। इसके बाद सभी जुलूस कर्बला के लिए रवाना हुए।
रास्ते में विभिन्न स्थानों पर लंगर की व्यवस्था की गई। कई मोहल्लों के ताजिए अपनी अनूठी कलाकारी और आकर्षक डिजाइनों के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। इनमें चांदी की छतरी वाला ताजिया, मोर के आकार का ताजिया, हंस की चोंच वाला ताजिया तथा सफेद खड़ी का ताजिया विशेष रूप से चर्चा में रहे।
जुलूस की व्यवस्था और संचालन में कौमी तहफ्फुज कमेटी, सामाजिक संगठनों, व्यापार मंडल और विभिन्न धर्मों के गणमान्य लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और यातायात की व्यापक व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
इस अवसर पर सभी धर्मों और वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे आयोजन में गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिली।
